उत्तराखण्ड क्रान्ति दल · स्थापना १९७९

काशी सिंह ऐरी

KASHI SINGH AIRY

नेता · विधायक · उत्तराखण्ड निर्माण के अग्रणी

उत्तराखण्ड वा उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के सर्वोच्च नेता हैं

⛰️ उत्तराखण्ड का बेटा

उत्तराखण्ड राज्य निर्माण में योगदान देने वाले सर्वोच्च नेता — चार बार विधायक, पार्टी के संस्थापक, और पहाड़ की आवाज़।

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उत्तराखण्ड मानचित्र
काशी सिंह ऐरी · Kashi Singh Airy
विधायक
१९७९पार्टी स्थापना
७५+प्रश्न पहले कार्यकाल में
२०००उत्तराखण्ड निर्माण

उत्तराखण्ड की सेवा में समर्पित जीवन

काशी सिंह ऐरी का जन्म १ जून १९५३ को पिथौरागढ़ जिले के धारचूला तहसील के पन्थागाँव गाँव में केहर सिंह और माता सुनीता देवी के घर हुआ। हिमालय की तराई से उठकर वे उत्तराखण्ड के सबसे दृढ़ और समर्पित नेता बने।

गहरी आस्था और असाधारण शैक्षणिक उपलब्धियों के धनी ऐरी जी ने कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल से एम.ए. (समाज विज्ञान) में स्वर्ण पदक प्राप्त किया — जो उनकी बौद्धिक गहराई और सार्वजनिक उद्देश्य दोनों को दर्शाता है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि स्नातक (LL.B.) की भी डिग्री प्राप्त की।

१९७९ में उन्होंने उत्तराखण्ड क्रान्ति दल की स्थापना की और अलग उत्तराखण्ड राज्य के आंदोलन का नेतृत्व किया। वर्ष २००० में उत्तराखण्ड राज्य का गठन हुआ — यह उन दशकों के संघर्ष का फल था जिसमें ऐरी जी की भूमिका सर्वोपरि रही।

जन्म१ जून १९५३, पन्थागाँव, धारचूला
जिलापिथौरागढ़, उत्तराखण्ड
दलउत्तराखण्ड क्रान्ति दल (संस्थापक)
क्षेत्रडीडीहाट / कनालीछीना / धारचूला
व्यवसायराजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता
निवासपिथौरागढ़, उत्तराखण्ड

अद्वितीय कीर्तिमान

🏔️
उत्तराखण्ड निर्माण के अग्रणी
उत्तराखण्ड राज्य की स्थापना में प्रमुख नेताओं में से एक के रूप में ऐरी जी का योगदान अतुलनीय है। उनके नेतृत्व में उत्तराखण्ड क्रान्ति दल ने दशकों तक संघर्ष किया।
पहले कार्यकाल में ७५+ प्रश्न
विधानसभा के पहले कार्यकाल में ही ७५ से अधिक प्रश्न पूछकर ऐरी जी ने ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया कि सदन को प्रश्नों की सीमा ५ प्रश्न प्रति कार्यकाल करने का विधेयक पास करना पड़ा।
🏅
स्वर्ण पदक विजेता
कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल से एम.ए. (समाज विज्ञान) में स्वर्ण पदक — उनकी बौद्धिक श्रेष्ठता का प्रमाण।
🗳️
चार बार के विधायक
उत्तर प्रदेश विधानसभा में तीन बार (डीडीहाट से) और उत्तराखण्ड की पहली विधानसभा में एक बार (कनालीछीना से) — लगातार जनविश्वास।

शिक्षा एवं योग्यताएँ

प्रारम्भिक शिक्षा
प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा
बलुवाकोट, पिथौरागढ़
इंटरमीडिएट
जी.आई.सी. नारायण नगर
डीडीहाट, पिथौरागढ़
स्नातक
बी.एससी.
जी.पी.जी.सी., पिथौरागढ़
🎓 छात्र संघ उपाध्यक्ष चुने गए — १९७३
स्नातकोत्तर
एम.एससी. (वनस्पति विज्ञान) एवं एम.ए. (समाज विज्ञान)
कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल
🏅 स्वर्ण पदक — एम.ए. समाज विज्ञान
विधि स्नातक
एल.एल.बी. (Bachelor of Laws)
लखनऊ विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश
छात्र नेतृत्व
उपाध्यक्ष, छात्र संघ
जी.पी.जी.सी., पिथौरागढ़ — १९७३
जीवनपर्यन्त राजनीतिक सेवा की नींव

विधायी इतिहास एवं संघर्ष

२५ जुलाई १९७९
उत्तराखण्ड क्रान्ति दल की स्थापना
मसूरी, उत्तर प्रदेश
बिपिन चंद्र त्रिपाठी, डी.डी. पंत इंद्रमणि बडोनी जसवंत सिंह एवं अन्य के साथ मिलकर ऐरी जी ने उत्तराखण्ड क्रान्ति दल को आगे बढ़ाया — यह दल अलग उत्तराखण्ड राज्य के आंदोलन का मुख्य राजनीतिक स्तंभ बना।
१९८५ – १९८९
विधान सभा सदस्य (प्रथम कार्यकाल)
डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र — उत्तर प्रदेश विधानसभा
पहले ही कार्यकाल में विधानसभा में ७५ से अधिक प्रश्न पूछकर ऐसा कीर्तिमान बनाया कि सदन को प्रश्न सीमा लागू करनी पड़ी। कुमाऊँ क्षेत्र के अधिकारों के प्रबल पक्षधर।
१९८९ – १९९१
विधान सभा सदस्य (द्वितीय कार्यकाल)
डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र — उत्तर प्रदेश विधानसभा
डीडीहाट से पुनः निर्वाचित होकर उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आंदोलन को विधानसभा के भीतर और तेज किया।
१९९३ – १९९६
विधान सभा सदस्य (तृतीय कार्यकाल)
डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र — उत्तर प्रदेश विधानसभा
लगातार तीसरी बार निर्वाचित। अलग पहाड़ी राज्य के लिए प्रयासों को और तीव्र किया।
९ नवम्बर २०००
उत्तराखण्ड राज्य का गठन — ऐतिहासिक दिन
नवीन राज्य उत्तरांचल (अब उत्तराखण्ड)
दशकों के संघर्ष का फल। उत्तरांचल (बाद में उत्तराखण्ड नामकरण) का गठन हुआ — ऐरी जी और उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के अथक प्रयासों का परिणाम।
२००२ – २००७
विधान सभा सदस्य (चतुर्थ कार्यकाल)
कनालीछीना विधानसभा — उत्तराखण्ड की प्रथम विधानसभा
नवगठित उत्तराखण्ड राज्य की पहली विधानसभा के सदस्य के रूप में राज्य के निर्माण और सुशासन में योगदान दिया।
२०१२
उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव
धारचूला विधानसभा क्षेत्र — पिथौरागढ़
धारचूला विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर अपने गृह क्षेत्र में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी जारी रखी।
क्यों चुनाव से दूर हुए ऐरी?
"अब चुनावों में पैसों का बोलबाला है और हम पैसों के पीछे कभी नहीं भागे। हम जैसे नेताओं ने संघर्ष ज़रूर किया, लेकिन अब नतीजा ये है कि बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में खुद को फिट नहीं पा रहे हैं।"

🚀 नई घोषणा: परंतु अब पार्टी के निर्णय के अनुसार, जनता के आशीर्वाद एवं जनभावनाओं के अनुरूप, काशी सिंह ऐरी जी चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं और उत्तराखण्ड सरकार का नेतृत्व करने का संकल्प लिया है। पहाड़ की आवाज़ एक बार फिर विधानसभा में गूँजेगी!

विशेष उपलब्धियाँ

🏛️
उ.क्रां.दल के संस्थापक सदस्य
१९७९ में मसूरी में उत्तराखण्ड क्रान्ति दल की स्थापना के चार सह-संस्थापकों में से एक।
📜
चार विधायी कार्यकाल
डीडीहाट (तीन बार, उ.प्र. विधानसभा) और कनालीछीना (उत्तराखण्ड की प्रथम विधानसभा) से निरंतर सेवा।
सदन में ७५+ प्रश्न — इतिहास
पहले कार्यकाल में ७५ से अधिक प्रश्न पूछे — सदन को प्रश्न सीमा ५ प्रति कार्यकाल करने का विधेयक पास करना पड़ा।
🏅
शैक्षणिक स्वर्ण पदक
कुमाऊँ विश्वविद्यालय से एम.ए. (समाज विज्ञान) में स्वर्ण पदक — बौद्धिक उत्कृष्टता का प्रतीक।
⛰️
उत्तराखण्ड निर्माण के अग्रणी
उत्तराखण्ड राज्य के गठन (९ नवम्बर २०००) के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक सूत्रधारों में अग्रणी।
⚖️
विधि विशेषज्ञता
लखनऊ विश्वविद्यालय से एल.एल.बी. — पिथौरागढ़ और कुमाऊँ क्षेत्र की जनता के अधिकारों की कानूनी रक्षा।

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कार्यालय पता
पिथौरागढ़, उत्तराखण्ड — २६२५०१
भारत
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विधानसभा क्षेत्र
पिथौरागढ़ जिला
उत्तराखण्ड, भारत
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