नेता · विधायक · उत्तराखण्ड निर्माण के अग्रणी
उत्तराखण्ड वा उत्तराखण्ड क्रान्ति दल के सर्वोच्च नेता हैं
उत्तराखण्ड राज्य निर्माण में योगदान देने वाले सर्वोच्च नेता — चार बार विधायक, पार्टी के संस्थापक, और पहाड़ की आवाज़।
काशी सिंह ऐरी का जन्म १ जून १९५३ को पिथौरागढ़ जिले के धारचूला तहसील के पन्थागाँव गाँव में केहर सिंह और माता सुनीता देवी के घर हुआ। हिमालय की तराई से उठकर वे उत्तराखण्ड के सबसे दृढ़ और समर्पित नेता बने।
गहरी आस्था और असाधारण शैक्षणिक उपलब्धियों के धनी ऐरी जी ने कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल से एम.ए. (समाज विज्ञान) में स्वर्ण पदक प्राप्त किया — जो उनकी बौद्धिक गहराई और सार्वजनिक उद्देश्य दोनों को दर्शाता है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि स्नातक (LL.B.) की भी डिग्री प्राप्त की।
१९७९ में उन्होंने उत्तराखण्ड क्रान्ति दल की स्थापना की और अलग उत्तराखण्ड राज्य के आंदोलन का नेतृत्व किया। वर्ष २००० में उत्तराखण्ड राज्य का गठन हुआ — यह उन दशकों के संघर्ष का फल था जिसमें ऐरी जी की भूमिका सर्वोपरि रही।
"अब चुनावों में पैसों का बोलबाला है और हम पैसों के पीछे कभी नहीं भागे। हम जैसे नेताओं ने संघर्ष ज़रूर किया, लेकिन अब नतीजा ये है कि बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में खुद को फिट नहीं पा रहे हैं।"
🚀 नई घोषणा: परंतु अब पार्टी के निर्णय के अनुसार, जनता के आशीर्वाद एवं जनभावनाओं के अनुरूप, काशी सिंह ऐरी जी चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं और उत्तराखण्ड सरकार का नेतृत्व करने का संकल्प लिया है। पहाड़ की आवाज़ एक बार फिर विधानसभा में गूँजेगी!